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सदर से जल्द सपा खोल सकती है पत्ते, आबिद रजा टिकट हासिल करने में लगभग कामयाब


यूपी बदायूं। जिले का सियासी तापमान सोमवार के बाद काफी बढ़ सकता है। शहर विधानसभा सीट पर सपा की ओर से पत्ते खुलना अब लगभग तय हो गया है। आबिद रजा लखनऊ पहुंचे हैं और आजम परिवार उनकी पैरवी में जुटा है। इधर, पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने निजी कार्यक्रम के बहाने बदायूं में आमद की है। कुछ बगावत की राह भी पकड़ सकते हैं। इससे पहले शेखूपुर विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक मुस्लिम खां बागी हो चुके हैं। सपा से टिकट न मिलने पर मुस्लिम खां बसपा में शामिल होकर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं।


भाजपा और बसपा की ओर से सभी छह सीटों पर प्रत्याशी उतारे जा चुके हैं। सपा की बात करें तो बिल्सी सीट सपा ने गठबंधन में शामिल महान दल को दे दी है। बिसौली, शेखूपुर और सहसवान से प्रत्याशी तय हो गए हैं, लेकिन अब तक शहर और दातागंज सीट को लेकर पेच फंसा हुआ है। शहर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक आबिद रजा सपा में नहीं हैं, लेकिन आजम खां और सलीम शेरवानी से नजदीकियों के सहारे उन्होंने सपा से टिकट हासिल करने में पूरा जोर लगा दिया है। आबिद की पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव से तल्खी के बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आबिद रजा शहर सीट पर सपा से टिकट हासिल करने में लगभग कामयाब माने जा रहे है।

वह कुछ दिन से रामपुर में थे और अब लखनऊ में डेरा जमा लिया है।


अगर आबिद रजा को सपा शहर सीट से प्रत्याशी बनाती है तो कई के अरमानों पर पानी फिर जाएगा। हाल ही में बसपा छोड़ सपा में शामिल हुए काजी रिजवान भी शहर सीट से मजबूत दावेदार बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वह शहर सीट से टिकट की शर्त पर ही सपा में शामिल हुए थे। पांच बार के विधायक राम सेवक सिंह पटेल के नाम से भी नामांकन पत्र खरीदा जा चुका है। पांच बार के विधायक रामसेवक सिंह भी हाल ही में भाजपा में वापस आए थे। उन्होंने शहर सीट से दावेदारी की थी, लेकिन शहर सीट से भाजपा ने महेश गुप्ता को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। अगर राम सेवक सिंह भाजपा से बगावत करते हुए मैदान में उतरे तो मुकाबला काफी रोचक हो जाएगा।

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दातागंज और शहर सीट पर सपा को बगावत का डर

शहर और दातागंज सीट पर भी सपा को बगावत का खतरा सता रहा है। शेखूपुर सीट पर बगावत हो चुकी है। दातागंज सीट से पूर्व विधायक और सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव के बेटे अवनीश यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चेतना सिंह के बेटे कैप्टन अर्जुन भी दावेदार हैं। पंचायत चुनाव के दौरान सपा में शामिल हुए दो बार के विधायक सिनोद शाक्य भी मजबूत दावेदार हैं। 2017 के चुनाव में कैप्टन अर्जुन बागी होकर चुनाव लड़ चुके हैं वह दूसरे नंबर पर रहे थे। अगर सिनोद शाक्य को प्रत्याशी बनाया जाता है तो यहां भी बागवत हो सकती है। शहर सीट पर काजी रिजवान, फखरे अहमद शोबी, हाजी रईस अहमद, राजीव राज दावेदार हैं। यहां आबिद रजा को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भितरघात का खतरा बना हुआ है। ऐसे में पार्टी पहले बगावत रोकने के लिए दावेदारों को साधने में लगी है।