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शहर के बीच स्थित धर्मशाला पर प्रशासन का छापा, काम करते मजदूर पकड़े, पड़े क्या है पूरा मामला


यूपी बदायूं। शहर के बीच स्थित एक धर्मशाला को बेचने के मामले में प्रशासन ने पुलिस बल के साथ रविवार को अचानक छापा डाल दिया। एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों को मौके से हिरासत में ले लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से लोगों में हड़कंप मच गया। काम न करने के आदेश के बाद भी काम होता मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी ने नाराजगी जतायी और मुख्य गेट पर अपना ताला डाल दिया। जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के काम पर सख्ती के साथ रोक लगा दी।


रविवार की दोपहर 12 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार, सीओ सिटी चंद्रपाल सिंह, कोतवाल देवेंद्र सिंह धामा सहित फोर्स के साथ शहर के मोहल्ला जोगीपुरा पहुंच गये। जोगीपुरा में श्रीकृष्ण धर्मशाला पर छापा डाल दिया, यहां गेट खोला और अंदर अफसर गये तो 14 मजदूर धर्मशाला को तोड़ने का काम कर रहे थे। फोर्स ने काम को रुकवा दिया और पूछा तो बताया कि ठेकेदार द्वारा तुड़वाया जा रहा है। यहां अफसरों ने सभी मजदूरों से काम बंद कराकर सभी मजदूरों को हिरासत में लिया और कोतवाली ले गये। वहीं बिल्डिंग पर प्रशासन ने अपने ताले डाल दिये हैं।


सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि पूरे मामले की जांच होने तक कुछ नहीं यहां होगा, यथास्थिति में जगह बिल्डिंग रहेगी। बतादें कि यह श्रीकृष्ण धर्मशाला है इसे बीते दिनों बेच दिया गया है। जिसका विरोध करने के बाद मामला डीएम तक पहुंचा दिया है।


ताला तोड़ा तो दर्ज होगा मुकदमा


धर्मशाला से काम बंद करा दिया है। यहां बार-बार अफसरों के मना करने के बाद भी काम को कराया जा रहा है, इसको लेकर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी नाराज हो गये। सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों गेटों पर ताला लगा दिया है। सीलकर करके पूरी तरह बंद करा दिया है और निर्देश दे दिये हैं कि अब इस गेट के ताले तोड़े गये तो अगली बार सीधे मुकदमा दर्ज किया जायेगा।


13 को होगी सुनवाई


श्रीकृष्ण धर्मशाला का मामला काफी गर्मा गया है। मामला डीएम के पास पहुंचने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई पर लग गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने इस मामले में बताया कि 13 जुलाई को तारीख लगी है 13 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी। सभी पक्ष वहां जाकर 13 जुलाई को सुनवाई करें, इसके बाद अग्रिम कार्रवाई का रास्ता साफ किया जायेगा।


1949 की निकली ईंट


जो धर्मशाला तोड़ी गई है और उसमें ईंटें जो निकली हैं वह 1949 ‌वर्ष की हैं। इससे साफ है कि धर्मशाला का निर्माण वर्ष 1949 व 50 में ही निर्माण कराया गा है।


60 से 70 साल पुराना रिकार्ड निकलवाया


शहर के जोगीपुरा की श्रीकृष्ण धर्मशाला प्रशासन से लेकर पुलिस के लिये गले की फांस बन गई है। धर्मशाला का बैनामा हो चुका है और उसके बाद फाइनल जांच करने के लिये सिटी मजिस्ट्रेट को डीएम ने लगाया है। जांच को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर पालिका से धर्मशाला का पुराना रिकार्ड निकलवाया है। जिसमें 60 से 70 वर्ष पुराना रिकार्ड निकाला है।


बेवजह तूल देने की कोशिश


इधर जमीन खरीदने वालों का कहना है कि रिकार्ड में यह धर्मशाला नहीं है और जर्जर थी। पालिका ने भी जर्जर होने के कारण इसे गिराने का नोटिस भी दिया था। कुछ लोग गलत तरीके ये इस मामले को तूल देने की कोशिश कर रहे हैं। धर्मशाला थी तो उसके बाहर की दुकानें कैसे निजी हो गयीं।


केयर टेकर ने बेच डाली बिल्डिंग


सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि शिकायत के बाद जांच पड़ताल की जा रही है। जांच पड़ताल में सामने आया है कि श्रीकृष्ण धर्मशाला का जो बैनामा किया गया है वह व्यक्ति उस धर्मशाला का केयर टेकर रह चुका है। वह धीरे-धीरे समय बीतने के बाद पूर्वजों की मौत के बाद केयर टेकर संपत्तिधारक बन गया और उसके बाद पब्लिक संपत्ति को बेच दिया है।


श्रीकृष्ण धर्मशाला का मामला है धर्मशाला पब्लिक संपत्ति होती है। बिकने के बाद डीएम से शिकायत हुयी थी हम जांच कर रहे हैं इसके बाद भी उसमें तोड़ने का कार्य कराया जा रहा था इसीलिये फोर्स के साथ जाकर काम बंद कराया है। ताला लगवा दिया है। मजदूरों को कोतवाली ले गये थे लेकिन बयान दर्ज करने के बाद कोतवाल को छोड़ने के निर्देश दे दिये हैं।


अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट