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कासगंज पुलिस कस्टडी मौत मामला: अखिलेश ने पुलिस पर उठाए सवाल न्यायिक जांच की मांग


यूपी। कासगंज: प्रदेश के कासगंज जिले में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मृतक परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। उन्होंने पीड़ित परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है। अखिलेश ने कहा पुलिस कस्टडी में मौत का सिलसिला थाने का नाम नहीं ले रहा है। यूपी पुलिस पूरी तरह से मनमाने तरीके से जुर्म को स्वीकार करने का दबाव बनाती है। जब कोई जुर्म को स्वीकार नहीं करता है तो उसे थर्ड डिग्री देकर मार दिया जाता है। उन्होंने कासगंज में पुलिस कस्टडी में सुसाइड पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिल 2 फुट ऊंची टोटी से साढ़े पांच फुट का युवक कैसे सुसाइड कर सकता है।


बता दें कि कासगंज में एक युवक को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिया था। परंतु उसकी थाने में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वहीं इससे लेकर पुलिस बता रही है कि युवक ने सुसाइड की है। वहीं विपक्षी दल इसे लेकर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहे है। अखिलेश ने इसे लेकर योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने ने कहा पुलिस पिटाई से युवक की मौत हुई है। पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। उन्होंने मामले में न्यायिक जांच की मांग की है।


पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि पूछताछ के दौरान अल्ताफ ने हवालात के अंदर बने बाथरूम में जाने की इच्छा जताई इस पर उसे इजाजत दे दी गई, वहां उसने जैकेट के हुक में लगी डोरी से बाथरूम के नल में फंसा कर अपना गला घोंटने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि देर तक नहीं लौटने पर पुलिसकर्मी बाथरूम में गए और अल्ताफ को अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोपी पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।


अखिलेश ने ट्वीट में कहा "कासगंज में पूछताछ के लिए लाए गए युवक की थाने में मौत का मामला बेहद संदेहास्पद है। लापरवाही के नाम पर कुछ पुलिसवालों का निलंबन सिर्फ़ दिखावटी कार्रवाई है। इस मामले में इंसाफ़ व भाजपा के राज में पुलिस में विश्वास की पुनर्स्थापना के लिए न्यायिक जांच होनी ही चाहिए।"भाजपा राज में हिरासत में एक और मौत । कासगंज में पुलिस हिरासत के दौरान युवक की हत्या, उप्र के ठोको पुलिस का एक और कारनामा है। उप्र में अपराधी और पुलिस लगातार मुख्यमंत्री की सरपरस्ती में कानून व्यवस्था का एनकाउंटर कर रहे हैं। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस चले, मिले सजा।"