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जिला अस्पताल में एआरवी खत्म, मरीजों ने सड़क पर लगाया जाम, ज़िम्मेदार कौन


बदायूं। जिला अस्पताल में करीब एक माह से एआरवी का संकट है मरीज रोजाना आते हैं और लाइन में लगकर लौट जाते हैं लेकिन ज़िम्मेदार मौन बने हुए है। मामला शनिवार का है आखिरकार मरीजों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने पहले अस्पताल में हंगामा किया। उसके बाद अस्पताल के बाहर सड़क पर जाम लगा दिया। इससे वाहनों की लंबी लाइन लग गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जैसे-तैसे मामला शांत कराया।

जिला अस्पताल में करीब 80-90 मरीज एआरवी लगवाने पहुंचे थे। उनसे ज्यादा तीमारदारों की संख्या रही होगी। बताते हैं कि मरीज अस्पताल खुलने के समय आने शुरू हो गए। उन्होंने ओपीडी में लाइन लगा ली। सुबह कुछ एआरवी थी। करीब 11 बजे तक मरीजों को एआरवी लगाई गई, लेकिन दोपहर एक बजे मना कर दिया गया कि एआरवी खत्म हो गई है। इस पर मरीजों में आक्रोश फैल गया।


एआरवी खत्म होने की खबर सुनकर परेशान हो गए और उन्होंने ओपीडी में हंगामा कर दिया। एआरवी कक्ष को मरीजों ने पूरी तरह से घेर लिया। किसी कर्मचारी को बाहर निकलने तक नहीं दिया। इससे ओपीडी में अफरातफरी मच गई। किसी तरह कर्मचारियों ने कहा कि वह इसकी शिकायत सीएमएस से करें। जो वैक्सीन आई थी, मरीजों को लगा दी गई है। अब वह अपनी जेब से नहीं खरीद पाएंगे। इससे गुस्साए मरीजों ने जिला अस्पताल के सामने जाकर वाहन लगा दिए और जाम लगा दिया। कुछ ही देर में अस्पताल के बाहर रोडवेज बस, कार और दर्जनों ई-रिक्शा, टेंपो आकर खड़े हो गए। लोगों को पैदल निकलना तक दुश्वार हो गया। इसकी सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने किसी तरह मरीजों को शांत कराया और उन्हें अंदर ले गई। तब कहीं जाम खुल सका।


इधर, पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बात की लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। बाद में मरीज अपने-अपने घर लौट गए। इन मरीजों में बनेई निवासी चंद्रपाल, घटपुरी निवासी दिनेशपाल, दियोरीजीत निवासी रामदीन, कासिमपुर निवासी संगम पुत्र कल्यान सिंह, बादशाहपुर निवासी पुष्पेंद्र, गुलड़िया के सहोरा निवासी रश्मि पत्नी अमित, जसेनी निवासी प्रवेश आदि कई दिन से चक्कर लगा रहे हैं।

खासपुर के थे सबसे ज्यादा मरीज

शनिवार को अस्पताल पहुंचे मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या खासपुर के मरीजों की थी। बताते हैं कि इस गांव में कई लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। शनिवार को उनमें से मोहम्मद जीशान, जमील, मोहम्मद शाहरुख समेत करीब सात-आठ लोग अस्पताल पहुंचे। इसके बावजूद उन्हें बैरंग गांव लौटना पड़ा।