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एआरवी की किल्लत को भ्रष्टाचारियों ने बनाया कमाई का जरिया, अभी भी कोई कार्रवाई नहीं


यूपी बदायूं। एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने के नाम पर रिश्वत लेने वाले चीफ फार्मासिस्ट जगप्रसाद भारती और चतुर्थ श्रेणी संविदा कर्मी विकास वर्मा के खिलाफ दूसरे दिन भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि, दोनों के खिलाफ सोमवार को कार्रवाई का संकेत मिला है। मामला निपटाने के लिए आरोपी फार्मासिस्ट ने रविवार सुबह से ही जिला मुख्यालय पर डेरा डाल लिया है। आरोपी काफी समय से एआरवी की किल्लत दिखाकर वसूली का धंधा कर रहे थे। वीडियो वायरल होने से यह बेनकाब हो गए हैं।


सहसवान सीएचसी की शनिवार को एक वीडियो वायरल हुई थी। वीडियो से साफ हो गया कि सरकारी अस्पतालों में एआरवी की किल्लत को भ्रष्टाचार स्वास्थ्य कर्मियों ने किस तरह से कमाई का जरिया बना रखा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कोल्हाई के एक ग्रामीण से एआरवी लगाने के बदले दो सौ रुपये वसूल किए गए। सौ रुपये चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विकास वर्मा और सौ रुपये चीफ फार्मासिस्ट जगप्रसाद भारती ने वसूले।


वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की काफी किरकिरी हो रही है। दरअसल, सीएचसी और पीएचसी पर एआरवी स्टॉक में निल दिखाकर वसूली की जा रही है। वीडियो वायरल होने के बाद दोनों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इधर, चीफ फार्मासिस्ट ने खुद को बचाने के लिए मुख्यालय पर डेरा डाल लिया है। सूत्रों की मानें तो रविवार को उसे सीएमओ आवास पर देखा गया। रविवार को मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एमओआईसी डॉ. इमरान सिद्दीकी का कहना है कि दोनों के खिलाफ मुख्यालय से कार्रवाई होनी है। इस संबंध में अधिकारियों को पूरी जानकारी दी गई है।


वैक्सीन से लेकर प्रसव और ऑपरेशन तक की जाती है वसूली

अधिकारी करते हैं भ्रष्टाचारियों का संरक्षण, नहीं होती कोई कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार कोई नया मामला नहीं है। हर स्तर पर भ्रष्टाचार है, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण के चलते कोई कार्रवाई नहीं होती। यूं तो सरकार निशुल्क चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराती है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं कमाई का जरिया बन गई हैं।

सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने से लेकर ऑपरेशन और प्रसव कराने तक के लिए रुपये लिए जाते हैं। प्रसव के लिए रुपये न देने पर जच्चा-बच्चा को सही इलाज नहीं दिया जाता। ऐसे में कई बार उनकी मौत तक हो जाती है। इसके बाद भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। सरकारी अस्पतालों की दवाएं बाजार में बिकने के मामले भी कई बार सामने आ चुके हैं। दूर-दराज गांवों से अस्पतालों में आने वाले ग्रामीणों को मेडिकल की दवाएं लिखी जाती हैं।


हाल ही में नेत्ररोग विभाग में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन के नाम पर वसूली का मामला सामने आ चुका है। मरीजों से एक हजार से चार हजार रुपये आपरेशन तक के वसूल जा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कभी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती।

एआरवी लगाने के लिए सहसवान सीएचसी पर रिश्वत लेने संबंधी वीडियो वायरल होने का मामला जानकारी में जाने के बाद इस संबंध में सीएमओ को दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अब तक क्या कार्रवाई की गई है इस बारे में अभी पता नहीं है।


डॉ. एसपी अग्रवाल, एडी हेल्थ


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