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आशाओं के कारनामें का प्रशासन ने भांडाफोड़ कर दिया तो छह घंटे तक बदले पतियों के नाम


यूपी बदायूं। खेड़ा नवादा स्थित आयशा नर्सिंग होम में पकड़ी गईं आशा कार्यकर्ताओं का मामला शासन तक पहुंच चुका है। आशा कार्यकर्ताओं को रविवार को नर्सिंग होम में गिफ्ट वितरण के दौरान पकड़ा था। अस्पताल संचालक सोहेल अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। रविवार शाम सभी को थाने से जमानत दे दी। मामला अफसरों के संज्ञान में आया, तो उन्होंने कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने सोमवार को अस्पताल संचालक सोहेल अहमद को घर के पास से पकड़कर जेल भेजा।


आशाओं के कारनामें का प्रशासन ने भांडाफोड़ कर दिया तो आशाओं की विभाग से लेकर घर परिवार और मोहल्ला, घर से लेकर गांव तक किरकरी हुयी है। प्रशासन ने मुकदमा दर्ज किया तो आशाओं की पहचान सामने लायी जा रही थी, ऐसे में आशाओं ने घर, परिवार की पहचान छिपाने के लिये झूठ बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, यहां तक कि पतियों तक के नाम बदल डाले हैं।


आशायें तो सिविल लाइंस थाने से जमानत पर देर रात को ही छोड़ दिया गया था, लेकिन आशाओं को कारनामा सोमवार को दिन भर चर्चा में रहा है। संचालक, अस्पताल और आशाओं पर कार्रवाई के लिये देरी करने का मामला प्रकाश में आया तो अधिकारियों ने हकीकत खोलकर आशाओं की रख दी। कहा कि आशायें रविवार को बिसौली रोड़ स्थित खेड़ा नवादा आयशा नर्सिंग होम से पकड़ा गया था।


35 आशायें, डॉक्टर सहित आयोजन में शामिल थे और प्रलोभन पार्टी चल रही थी, जिसमें पुलिस आशाओं को वहां से हिरासत में लेकर थाने लायी। इसके बाद देररात तहरीर की प्रक्रिया का नंबर आया तो आशायें अपनी समाज में किरकरी होने से बचाने के लिये अपना नाम तो सही बता रहीं थी लेकिन जब गांव और पतियों के नाम पूछे जा रहे थे तो अधिकारियों को बार-बार नाम बदल रहीं थी। डांट फटकार लगाई तो पतियों के नाम बदलकर बताये हैं। इधर डीपीएम ने भी आशाओं को बचाने में पूरा प्रयास किया। प्रशासन ने छापा दोपहर में ही एक बजे मार दिया था, लेकिन कार्रवाई करने में छह घंटे से ज्यादा लगा दिये।


उपहार देने को रविवार को कार्यक्रम किया। चूंकि कई आशा कार्यकर्ता सरकारी अस्पतालों की जगह उसके अस्पताल तक गर्भवती महिलाओं को ले जाने का काम करती हैं। ऐसे में वह अन्य आशा को भी बुलाकर लाई थीं। सुबह 10 बजे से गिफ्ट वितरण शुरू हुआ। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं की भीड़ नहीं लगे। इसके लिए उसने उन्हें गिफ्ट देकर अपनी योजना बताई और उनको वहां से रवाना करना शुरू कर दिया। डीएम कुमार प्रशांत ने इस तरह की शिकायत मिलने पर गोपनीय छापा मारने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे तो अस्पताल मे गिफ्ट वितरण कार्यक्रम चलता मिला। आशा कार्यकर्ताओं ने भागने की कोशिश की तो महिला पुलिस ने घेराबंदी कर उनको पकड़ लिया। मौके से 40 महिलाएं पकड़ी गईं। लेकिन, सत्यापन में 35 आशा वर्कर सामने आईं।


आशा कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल संचालक सोहेल अहमद पर भी मुकदमा दर्ज किया था। उसकी जमानत की बात कुछ लोग कर रहे थे। मगर, उसको जमानत नहीं दी थी। आरोपित सोहेल अहमद को जेल भेजा है। बाकी आरोपितों को रविवार रात जमानत पर छोड़ दिया था।


सुधाकर पांडेय, एसएचओ सिविल लाइंस

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