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बदायूं खानकाहे आलिया क़ादरिया शहीद महल में शबे मेराज पर सेमीनार का आयोजन किया


यूपी बदायूं खानकाहे आलिया क़ादरिया शहीद महल में जेरे एहतमाम हजरत शेख मौलाना अब्दुल गनी मुहम्मद अतीफ कादरी साहब सज्जादा नशीन खानकाहे कादरी की सरपरस्ती में शहीद महल में एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक था - मेराजे मुस्तफा मुफ्स्सिरीन, मुहददिसीन का मोकिफ

सेमीनार का आगाज हाफिज असद कादरी ने तिलावते कुरान से किया उसके बाद अब्दुल हन्नान कादरी ने नाते रसूल पढी।


सर्व प्रथम मौलाना अनवर कादरी ने अपना मकाला पेश किया.. उन्होंने कहाकि अल्लाह तआला ने पैगम्बरे इस्लाम को अपने फरिश्ते के द्वारा मस्जिद हराम मक्का से पहले बैतुल मकदस बुलवाया वहां आप ने तमाम नबियो की इमामत की। उसके बाद आसमान पर बुला कर जन्नत और दोजख दिखाई।


फरिश्तों ने आपकी बहुत ताजीम की अर्श पर उनकी सवारी आई हूरो गिलमा ने बिछा लीं आंखें मुफ्ती दिलशाद अहमद साहब ने मकाला पेश फरमाया-आपने पढा

पैगम्बरे इस्लाम के मेराज के सफर को मुहददिसीन ने दो तरह से ब्यान किया है एक कहते हैं कि यह सफर रूहानी था और दूसरे कहते हैं कि यह सफर जिस्मानी था। हकीकत यह है कि यह सफर जिस्मानी था।


मौलाना इरशाद आलम नौमानी साहब ने अपने मकाले में फरमाया - सूफिया किराम नेमेराज के सफर को जिस्मानी और रूहानी माना है सूफिया ने फरमाया पैगम्बरे इस्लाम ने अल्लाह का दीदार दिल की आंखों से भी किया है।

आखिर में हजरत शेख मौलाना अतीफ कादरी जीदत माली ने अपना मकाला पेश फरमाया-आपने फरमाया मेराजे मुस्तफा को मुसलमानों के हर तबके ने माना है। रूहानी व जिस्मानी। नबी करीम ने अल्लाह का दीदार बहुत करीब से किया है।


इसका जिक्र कुरान की सूरह नजम में है। वहां आप को पूरी जन्नत की सैर करवाई गई। अल्लाह तआला ने इसी सफर में मुसलमानों पर पांच वक्त की नमाज फर्ज की। अंत में सलाम पढा गया। सेमीनार का संचालन मौलाना अहमद सईद ने किया। बड़ी संख्या में अंत तक श्रोता सेमीनार में उपस्थित रहे।