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अस्पताल में कोरोना मरीज को सौ रुपये में तीन बार भोजन? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी डिटेल


यूपी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर सॉलिसिटर जनरल द्वारा पेश हलफनामे पर असंतोषजनक जताया है। कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी करने, ऑक्सीजन व जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता से संबं‌धित जान‌कारियां हलफनामे में नहीं दी गई हैं। कोर्ट ने कोविड मरीजों को अस्पतालों में उपलब्ध कराए जा रहे पौष्टिक आहार और कोर्ट ने कोरोना से हुई मौतों का तारीखवार ब्योरा उपलब्ध न कराने पर भी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि सरकार के हलफनामें में जो आंकड़े दिए गए हैं, वे आश्चर्यजनक रूप से यह बताते हैं कि परीक्षण की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई है। 22 अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई।


राज्य में जिलों की संख्या को देखते हुए एम्बुलेंस भी बहुत कम हैं। लेवल -1, लेवल -2 और लेवल -3 श्रेणी के अस्पतालों को दिए जाने वाले भोजन के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। केवल यह बताया गया है कि लेवल -1 अस्पताल में प्रति रोगी 100 रुपये का आवंटन किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि कोविड रोगी को अत्यधिक पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, जिसमें फल व दूध शामिल करना चाहिए और न्यायालय यह समझ नहीं पा रहा है कि कैसे प्रति व्यक्ति बजट में 100 रुपये के साथ सरकार लेवल -1 श्रेणी में तीन बार भोजन का प्रबंध कर रही है वह भी 2100 आवश्यक कैलोरी के साथ। लेवल -2 और लेवल -3 अस्पतालों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने सभी श्रेणी के अस्पतालों के संबंध में प्रत्येक आइटम की कैलोरी गणना के साथ भोजन विवरण पेश करने को कहा है।


जो नहीं करा सकते रजिस्ट्रेशन उनके लिए क्या है व्यवस्था

दिव्यांगों को वैक्सीन लगाने के सम्बंध में किए गए आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार का कहना था कि वह केंद्र सरकार की गाइड लाइन का ही पालन कर रही है। केंद्र की गाइड लाइन में इस बारे में कोई निर्देश नहीं दिया गया है। इसी प्रकार 45 से कम आयु के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने के मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अशिक्षित लोगों और मजदूर जो स्वयं अपना ऑन लाइन रिजस्ट्रेशन करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें वैक्सीन लगाने के लिए क्या योजना है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि दिव्यांगों को वैक्सीन लगाने के लिए खुद की नीति बनाने में उसे ‌क्या परेशानी आ रही है।कोर्ट ने कहा कि हमारी आबादी की एक बड़ी संख्या अब भी गांवों में रहती है। कई ऐसे लोग हैं जो केवल 18 और 45 वर्ष की आयु के बीच के मजदूर हैं और वे टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से 18 वर्ष से 45 वर्ष के बीच अशिक्षित मजदूरों और ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा सकने वाले ग्रामीणों के वैक्सीनेशन की कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हम आशा करते हैं कि राज्य सरकार दो-तीन महीने में कम से कम दो तिहाई से अधिक लोगों को टीका लगाने के लिए वैक्सीन खरीदने की कोशिश करेगी।