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Hajj 2021: यौमे अराफात का दिन, सख्त नियमों के बीच हज की अदाएगी कर रहे हुज्जाज


खबर विदेश। बड़े दिन मुबारक यौमे अराफात का दिन, हाजी हज की अदाएगी कर रहे और अपने रब की इबादत में मशगूर है। कोरोना महामारी के बीच पवित्र मक्का में शनिवार को हज की शुरुआत हो गई. महामारी के दौर में यह दूसरी हज यात्रा है. शनिवार को जायरीनों का जत्था मक्का पहुंचा. सोमवार यानी आज हज का तीसरा और यौमे अराफात का दिन है।


अराफात का दिन इस्लामिक कैलेंडर के ज़ूल -हिजाह के 9 वें दिन आता है। यह हज यात्रा का दूसरा दिन है और इसके बाद ईद अल-अधा के प्रमुख इस्लामी अवकाश का पहला दिन है। इस दिन भोर में, मुस्लिम तीर्थयात्री मीना से पास के पहाड़ी और सादे मैदान में अपना रास्ता बनाएंगे, जिसे माउंट अराफा और प्लेन ऑफ अराफा कहा जाता है।


माउंट अराफा एक ग्रेनाइट पहाड़ी है जो लगभग 20 कि॰मी॰ (12 मील) अरफा के मैदान में मक्का के दक्षिण-पूर्व में। माउंट अराफा लगभग 70 मी॰ (230 फीट) तक पहुंचता है ऊंचाई में और "माउंटेन ऑफ मर्सी" ( जबल आर-रहमाह ) के रूप में जाना जाता है। इस्लामी परंपरा के अनुसार, पहाड़ी वह स्थान है जहाँ इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने खड़े होकर मुसलमानों को विदाई दी थी जो उनके जीवन के अंत की ओर हज के लिए उनके साथ थे।


बकरीद हज यात्रा भी इसी बीच होती है. हज लंबी और कठिन प्रक्रिया है. ऐसी रस्में होती हैं, जो क्रमबद्ध तरीके से पूरी की जाती है. अगर इन रस्मों में से एक भी पूरी न की जाए तो हज यात्रा भी पूरी नहीं होती है. हज के लिए अहम पांच पड़ाव होते हैं. ज़ूल -हिजाह के 10 वें दिन बकरीद मनाई जाती है।


वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वालों को ही अनुमति इस बार हज यात्रा में वो 60 हज़ार स्थानीय लोग शामिल हो पाये हैं जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं. इसके अलावा एक ऑनलाइन पूल के माध्यम से 55,000 आवेदकों में से कुछ लोगों को चुना गया है. हज करने वालों के लिए यह अनिवार्य शर्त रखी गई थी कि उन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी होनी चाहिए. इसके साथ ही हज करने वालों की आयु 18 से 65 साल के बीच रखी गई. साथ ही ये भी शर्त थी कि उन्हें कोई पुरानी बीमारी ना हो।



तीन घंटे में 6 हजार लोग ही अनुष्ठान कर सकते हैं हज मंत्रालय ने कहा है कि इस साल की हज यात्रा को महामारी को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया है जिसके लिए उच्चतम स्तर की सावधानियां बरती जा रही हैं. मंत्रालय के मुताबिक हर तीन घंटे में 6,000 लोग तवाफ करने के लिए प्रवेश करते हैं. प्रत्येक समूह के जाने के बाद सैनेटाइज़ेशन किया जाता है. अधिकारियों ने ये भी बताया कि तीर्थयात्रियों को 20 के समूहों में विभाजित किया गया है, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जा सके. श्रद्धालु तवाफ करने के लिए मक्का की बड़ी मस्जिद की यात्रा करते हैं, जहां वो काबा के चारों ओर चक्कर लगाते हैं. इस्लाम में पृथ्वी पर इस स्थान को सबसे पवित्र बिंदु के रूप में माना जाता है. हज करने वाले इसके सात चक्कर लगाते हैं. इसके बाद वे आसपास के दूसरे पवित्र स्थलों की पांच दिवसीय तीर्थयात्रा करते हैं।