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प्रशासन सख्त तो दुकानों से गायब शराब, जो भी दोषी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई संकल्प शर्मा, एसएसपी


यूपी बदायूं। शराब माफिया और आबकारी विभाग का चोली-दामन का साथ है। आबकारी विभाग की मर्जी के बिना शराब में एक बूंद मिलावट नहीं हो सकती। लक्ष्य पूर्ति के बहाने अधिकृत दुकानों के साथ अनाधिकृत दुकानों का भी संचालन किया जा रहा है। तिगुलापुर शराब कांड ने सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त छापामारी शुरू हुई तो दुकानों से शराब गायब हो गई। तर्क दिया जा रहा है कि वित्तीय वर्ष का समापन होने की वजह से सप्लाई नहीं मिल सकी है, जबकि हकीकत यह है कि मिलावटी शराब को तहखाने में छिपा दिया गया है।



पंचायत चुनाव में अवैध शराब खपाने की शुरूआत होली पर ही कर दी गई थी। मूसाझाग थाना क्षेत्र के तिगुलापुर गांव में अवैध शराब से हुई ग्रामीणों की मौत और एक युवक की आंख की रोशनी चले जाने का मामला उजागर होने के बाद जब पुलिस ने सख्ती की तो पता चला कि जिलेभर में अवैध शराब का रैकेट चल रहा है। मास्टमाइंड सत्ताधारी पार्टी के एक नेता का फुफेरा भाई यशपाल सिंह पटेल को बताया जा रहा है। पिछले दिनों इसे कछला में अवैध शराब को पौव्वा और बोतल में भरकर बेचने के आरोप में पकड़ा गया था। तिगुलापुर में मिले खाली पौव्वा और ढक्कन से तार बदायूं के पुरानी चुंगी स्थित शराब की दुकान से जुड़े तो यहां भी बड़े पैमाने पर अवैध शराब के कारोबार से जुड़े साक्ष्य मिले। छानबीन हुई तो पता चला कि इस अवैध कारोबार का संचालन यशपाल ही कर रहा था। दुकान तो उसके नाम नहीं थी, लेकिन पर्दे के पीछे वही काम कर रहा था। तिगुलापुर में शराब भी इसी के माध्यम से पहुंची थी। जिले के कई और दुकानों पर भी इसके जरिये अवैध शराब खपाने की बात भी सामने आई है। आबकारी विभाग के अधिकारी एक-एक दुकान पर नजर रखते हैं। लक्ष्य पूरा कराने का दबाव तो रहता है, लेकिन इसकी आड़ में अवैध शराब के कारोबार का संचालन भी धड़ल्ले से होता चला आ रहा है। आबकारी अधिकारी भी अपने हिस्से का नजराना लेकर खामोश हो जाते हैं। अब छापामारी शुरू हुई तो दुकानों से शराब ही गायब हो गई है। तिगुलापुर की घटना के बाद अब आबकारी विभाग जिलाधिकारी के निशाने पर है। अभी तक सिर्फ एक आबकारी इंस्पेक्टर पर कार्रवाई हुई है, कुछ और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। शराब पर नहीं रुकी ओवररेटिग


डीएम दीपा रंजन ने जिले का चार्ज संभालते ही सख्त निर्देश दिए थे कि शराब की बिक्री पर ओवररेटिग नहीं होनी चाहिए। इसके बाद भी होली पर ओवररेटिग को लेकर म्याऊं में जहां फायरिग हुई वहीं शहर में पुरानी चुंगी की दुकान का वीडियो भी वायरल हुआ, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं हुई। अवैध शराब की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। पुलिस उनका सहयोग करती है। तिगुलापुर में प्रथम ²ष्टया लापरवाही मिलने पर एसएचओ, हल्का इंचार्ज और बीट कांस्टेबल को निलंबित किया जा चुका है। अवैध शराब की बिक्री रोकने की लिए संयुक्त टीम बनाकर छापामारी की जा रही है, जो भी दोषी मिल रहा है उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।


संकल्प शर्मा, एसएसपी