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गरीव नवाज़ का 809वें उर्स में ज़ायरीन की भीड़ हर ओर से यही आवाज, ख्वाजा का दामन नहीं छोड़ेंगे


खबर देश। हिंदुल वली हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 809वें उर्स के छोटे कुल की रस्म शुक्रवार को अदा की जाएगी। दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन की सदारत में होने वाली इस रस्म के बाद जन्नती दरवाजा मामूल कर दिया जाएगा। इधर, उर्स में शरीक होने आए आशिकान ए ख्वाजा जुमे की नमाज भी अदा करेंगे। उर्स में अकीदतमंद के पहुंचने का सिलसिला जारी है। मजार पर अकीदत का नजराना पेश कर मन्नत मांगने का सिलसिला जारी है।


कलाम पेश किये गए दरगाह के महफिल खाना में उर्स की पांचवीं महफिल दरगाह दीवान आबेदीन की सदारत में हुई। शाही कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। मध्य रात्रि को दीवान आबेदीन ने मजार शरीफ को केवड़े व गुलाब जल से गुस्ल दिया।


एक घंटे पहले होगी कुल की फातिहा शुक्रवार दोपहर 12.15 बजे कुल की रस्म होगी। दरगाह दीवान के जन्नती दरवाजे से दाखिल होते ही यह दरवाजा मामूल होगा। 12.45 बजे शाहजहांनी मस्जिद में जुमे की अजान होगी। दोपहर 1.10 बजे जुमे की नमाज अदा होगी।


बड़ा कुल 22 को इधर उर्स के बड़े कुल की रस्म 22 फरवरी को अदा की जाएगी। खुद्दाम ए ख्वाजा की ओर से यह रस्म अदा कराई जाएगी।


सिलसिला-ए-चिश्तीयां की खानकाहो में मकबूल ‘बसंत‘ को शहंशाहे हिंद ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह शरीफ में मर्सरतों-अकीदत के साथ गुरुवार को सादगी से मनाया गया। लंबे समय बाद ऐसा संयोग बना है जब गरीब नवाज के उर्स के दौरान ही दरगाह में बसंत पेश की गई। इस मौके पर दरगाह शरीफ के शाही कव्वाल असरार हुसैन और साथी ने हजरत अमीर खुसरो और हजरत नियाज बे नियाज के लिखे बंसत गीतों को रागे बसंत में गाए।


गुरूवार की सुबह दरगाह ख्वाजा साहब के निजाम गेट से दरगाह दीवान की अगुवाई में शाही कव्वाल सरसों और गुलाब के खूबसूरत फूलों से सजे बसंत के गुलदस्तों को खानकाही अंदाज में मजार शरीफ पर पेश किया। दरगाह कमेटी की ओर से बसंत में नाजिम अशफाक हुसैन और अन्य सहयोगी कर्मचारी भी शामिल हुए। इसके साथ ही कई खुद्दाम हजरात और आशिकाने ख्वाजा ने भी बसंत में शिरकत की। कोविड-19 को देखते हुए इस बार यह परंपरा सादगी से निभाई जाएगी।