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बदायूं में सरकार के मंत्री बोले- मई तक पूरी कर ली जाएगी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया


यूपी। प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। भले पंचायत चुनाव की विधिवत घोषणा में अभी समय हो, लेकिन गांवों में प्रधानी व बीडीसी चुनाव का डंका लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा है। गांव पूरी तरह चुनावी मोड में आ गए हैं। इसी बीच प्रदेश के पंचायती राज्य मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि मई तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।


बदायूं पहुंचे मंत्री ने कहा कि फरवरी माह के तीसरे सप्ताह से शुरू कर मई तक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। बता दें कि कोरोना के कारण पंचयात चुनाव में पहले ही देरी हो चुकी है। बदायूं में मंत्री ने पंचायत चुनाव के सिलसिले में पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और तैयारियों का जायजा लिया।


वहीं, पंचायत विभाग के सूत्रों के अनुसार 10 जनवरी की बैठक में आरक्षण के नए फॉर्मूले पर मुहर लग सकती है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बार ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतों में नए सिरे से आरक्षण हो सकता हैं। 2015 के पंचायत चुनाव में भी सीटों का आरक्षण नए सिरे से हुआ था। एक बार फिर से नए सिरे से आरक्षण ने सभी दावेदारों के गणित को बिगाड़ दिया हैं। इसी सब के चलते फिलहाल सबकी नजर, पंचायत चुनाव में लागू होने जा रहे आरक्षण पर लगी है। वहीं परिसीमन व वोटर लिस्ट का काम चल रहा है जिससे देहात का माहौल धीरे धीरे चुनावी होता जा रहा हैं।


यह हो सकता हैं फॉर्मूला


जानकारों के अनुसार, हर ब्लॉक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े और सामान्य वर्ग की आबादी अंकित करते हुए ग्राम पंचायतों की सूची वर्णमाला के क्रम में बनाई जाएगी। इसमें एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग के लिए प्रधानों के आरक्षित पदों की संख्या उस ब्लॉक पर अलग-अलग पंचायतों में उस वर्ग की आबादी के अनुपात में घटते क्रम में होगी। यानी साफ है कि 2015 में जो पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, उन्हें इस बार उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा। यानी अगर 2015 में पंचायत का प्रधान पद एससी-एसटी के लिए आरक्षित था तो इस बार उसे दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा।

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