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इमाम ए आली मकाम ने सच्चाई और ईमानदारी के लिए दी थी शहादत झूट के आगे नहीं झुकाया सर


यूपी बदायूं। मुहर्रम पर हजरत इमाम हुसैन साहब की शहादत से प्रेरणा लेने की गुजारिश अन्याय व दमन के खिलाफ सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलते हुए हजरत इमाम हुसैन साहब ने अपनी शहादत दी थी। मुहर्रम’ की दसवीं तारीख को हम उनकी शहादत को याद कर अपने देश में शांति, सद्भावना, प्रेम और भाईचारा विकसित करने के लिए दृढ़ संकल्पित होते हैं। शुक्रवार को मुहर्रम की दसवीं तारीख है जिसे आशूरा का दिन भी कहते है। इस दिन रोज़ा रखकर इबादत की जाती है।


पैगंबर इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथी (बच्चे व औरतें) ने सच्चाई, मानव कल्याण, शरीयत का बचाव, कुरान शरीफ की हिफाजत और हक की सरबुलंदी के लिए करबला में भूखे रहकर जो शहादत दी, इसकी मिसाल नहीं मिल सकती है। अगर वे चाहते तो शहीद न भी होते, लेकिन हमेशा के लिए सच्चाई नाकाम हो जाती। आज इनको मानने वाले करोड़ों हैं। 14 सौ साल से अधिक समय से इनकी याद में पूरी दुनिया में कार्यक्रम होते हैं। उन्होंने बातिल व अन्याय के आगे झुकना पसंद नहीं किया। कर्बला के मैदान में तलवार के साये में भी नमाज अदा की जब तक रहेगी दुनिया तब तक याद रखी जाएगी हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी।

Mohammad Zubair Qadri