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डिस्पेंसरी के नाम पर अवैध रूप से संचालित हैं मेडिकल, दवा के व्यापार में अवैध कारोबार बड़े स्तर पर


यूपी बदायूं। एक ओर जहाँ महंगाई के नाम पर दवाओं पर जमकर मेडिकल स्टोर लूट मचाये हुए है तो वही जिले में दवा के व्यापार में अवैध कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में इस कारोबार को बड़ा सहारा दिया है। यहां डिस्पेंसरी के नाम पर प्रशसान को गुमराह कर रहे हैं और बड़ा व्यवसाय कर रहे हैं। मगर ड्रग विभाग ने कभी परवाह नहीं की।


जिल में दवा के व्यापार को सरकारी प्रक्रिया से बाहर होकर ज्यादातर किया जा रहा है। औषधि विभाग के नियम और कानून का पालन तो चंद लोग ही कर रहे हैं। औषधि विभाग में थोक से लेकर फुटकर दवा विक्रेता के करीब 2500 लाइसेंस हैं। इसके अलावा जिले में करीब 1500 से ज्यादा प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। जिनकी राजस्व हानि भी औषधि विभाग को हो रही है।


जिले में 250 से ज्यादा डिस्पेंसरी प्राइ‌वेट अस्पतालों में चल रही हैं। इसके अलावा 750 झोलाछाप डिस्पेंसरी और अवैध मेडिकल संचालित किये हैं। इसके अलावा 300 से ज्यादा जरनल स्टोर में अवैध रूप से दवाओं के प्रतिष्ठान चल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले भर में करीब 200 मेडिकल स्टोर ऐसे संचालित हैं, जिन्होंने लाइसेंस ही नहीं लिये हैं।


जरनल स्टोर में भी दवा की बिक्री


शहर से ज्यादा देहात इलाकों में दवा का अवैध रूप से व्यापार हो रहा है। गांव देहात इलाकों में जरनल स्टोर संचालक भी दवा की बिक्री कर रहे हैं न तो कोई डिग्री है नहीं कोई लाइसेंस है मगर दवा की बिक्री कर रहे हैं। जिससे तमाम लोगों की जान जा चुकी है मगर परवाह किसी को नहीं है।


झोलाछाप चला रहे मेडिकल स्टोर


जिले में झोलाछाप की बात करें तो उनका पूरा व्यवसाय ही अवैध रूप से है। जिसमें वह मेडिकल स्टोर भी अवैध रूप से चला रहे हैं। जिले में 750 झोलाछाप हैं जो चिकित्सा व्यवसाय पूरी तरह से अवैध रूप से कल रहे हैं उनके पास डॉक्टरी की डिग्री नहीं है इसलिये झोलाछाप हैं। इसी तरह से मेडिकल स्टोर चलाने की भी डिग्री नहीं है इसलिये लाइसेंस नहीं ले पाये हैं। चिकित्सा व्यवसाय पर स्वास्थ्य विभाग तो गौर कर ही नहीं पा रहा है साथ ही ड्रग्स विभाग भी कार्रवाई नहीं कर रहा है।


अवैध दवा विक्रेताओं के खिलाफ अभियान जारी है, छापामारी और कार्रवाई जारी है। प्राइवेट अस्पताल संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी। अस्पताल संचालक डिस्पेंसरी को उसी की सीमा तक चलायेंगे, उससे ज्यादा दवा व्यापार को लाइसेंस लेकर ही चला सकेंगे।


नवनीत कुमार, औषधि निरीक्षक बदायूं