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UP MLC चुनाव, अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी ने दाखिल किया नामांकन; अखिलेश बोले- दोनों नेता जीतेंगे


यूपी। प्रदेश में विधान परिषद की 12 सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी ने अपना नामांकन प्रपत्र दाखिल किया। इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे। अखिलेश ने भरोसा जताया है कि उनके दोनों प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधान परिषद सदस्य पहुंचेंगे।


मायावती को दी जन्मदिन की बधाई


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी मायावती के जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी है। मायावती के द्वारा विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी से गठबंधन न करने के ऐलान पर जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह किसी दल का फैसला है, उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि वे इस दौरान भाजपा सरकार पर निशाना साधना नहीं भूले। पूछा कि देश और प्रदेश की सरकार बताए कि जनता को फ्री वैक्सीन कब मिलेगी?


रोचक बना UP का MLC चुनाव


28 जनवरी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 12 सीटों पर चुनाव होना है। संख्याबल के हिसाब से भाजपा 10 सीटों पर आसानी से चुनाव जीत सकती है। वहीं सपा एक सीट पर आसानी से चुनाव जीत सकती है। लेकिन सपा ने दो उम्मीदवार उतारे हैं। एक सीट को जिताने के लिए 31 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। वर्तमान में सपा के पास 49 विधायक हैं। इनमें नितिन अग्रवाल बागी हैं।


शिवपाल यादव अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं। ऐसे में सपा की संख्या 47 हो जाती है। 31 वोट के बाद 16 विधायक ही बचते हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि विपक्षी दल के विधायक सपा की मदद कर सकते हैं।


जानिए कौन हैं राजेंद्र चौधरी और अहमद हसन?


अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी दोनों ही नाम सपा के बड़े नेताओं में शुमार होते हैं। अहमद हसन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं। IPS की नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सपा का दामन थामा था। इसके बाद से ही विधान परिषद के सदस्य हैं। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इतना ही नहीं वो सपा में मुस्लिम समुदाय का OBC चेहरा माने जाते हैं। अहमद हसन UP में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी अंसारी (जुलाहा) समुदाय से आते हैं।

राजेंद्र चौधरी पिछले करीब 40 साल से मुलायम सिंह यादव से जुड़े हैं। चौधरी चरण सिंह ने उन्हें 1974 में गाजियाबाद से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वो चुनाव हार गए थे। हालांकि 1977 में वो उसी सीट से जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव सहकारिता मंत्री थे। यहीं से दोनों नेता करीब आए, तब से लेकर राजेंद्र चौधरी और मुलायम सिंह यादव का रिश्ता अटूट रहा। लोकदल का बंटवारा हुआ तो ज्यादातर जाट नेता अजित सिंह के साथ चले गए, लेकिन राजेंद्र चौधरी ने मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ा। 2012 में जब अखिलेश यादव सूबे के सीएम बने, तो भी राजेंद्र चौधरी उनके साथ साए की तरह दिखते रहे। लंबे वक्त तक राजेंद्र चौधरी ने सपा के प्रवक्ता के तौर पर काम किया।