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पोस्टमार्टम हाउस पर एक तरफ दलदल तो दूसरे गेट में करंट, दुर्दशा से भीतर तक पैदल ले जाते शव


बदायूं। जिले में बने माडर्न पोस्टमार्टम हाउस पर शवों को ले जाना परिजनों समेत पुलिस को टेंशन बन चुका है। वजह है कि जहां एक ओर रेलवे के अंडरपास निर्माण के कारण नए रास्ते को दलदल में तब्दील कर दिया गया है।


वहीं पुराने वाले गेट में ओवरहेड लाइन का करंट दौड़ रहा है। उस गेट पर ताला भी जड़ा हुआ है। अपनी जान जोखिम में डालकर परिजन शव को पुराने गेट से दुर्दशा के साथ लेकर भीतर तक पैदल ले जाते हैं। कहने को तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पॉवर कारपोरेशन को लिखापढ़ी की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।


गुरुवार को पोस्टमार्टम हाउस से परिजन शव बिना रास्ते के ही दुदर्शा के साथ ले गये। परिजनों ने दुर्दशा के साथ शव को सही से न ले गये इस तरह से शव ले जाने की मजबूरी रही। बता दें कि सूबे के 16 जिलों में साल 2011 में माडर्न पोस्टमार्टम हाउस बनाने की सूची जारी हुई थी। इसमें बदायूं का नाम भी शामिल था। नतीजतन चार साल बाद करोड़ों की लागत से बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई। इसमें जहां एक कक्ष पोस्टमार्टम करने के लिए बनाया गया है। वहीं एक डॉक्टर रूम, शवों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर रूम बना है। इसके अलावा एक गार्ड रूम भी बनाया गया है। वैसे तो यहां शवों के साथ आने वाले गमगीन परिजनों के बैठने के लिए भी कमरा आरक्षित था लेकिन अभी तक नहीं खोला जा सका है।


ये है व्यवस्था


पोस्टमार्टम हाउस में छह महीने पहले तक शव ले जाने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर से रास्ता जाता था। वहां नए गेट का निर्माण कर दिया गया। जबकि यह गेट केवल दिखावे को ही रह गया, क्योंकि गेट निर्माण के बाद वहां डाला गया ताला जस का तस पड़ा हुआ है। जबकि शवों को लाने के लिए नेकपुर रेलवे क्रासिंग से सटकर जा रही रोड के जरिए पोस्टमार्टम हाउस के पीछे वाले गेट को खोल दिया गया।


ये आ रही है दिक्कत


जिस गेट पर प्रशासन ने ताला जड़वा दिया है, उससे सटकर एक छोटे से रास्ते से पैदल लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंच जाते थे लेकिन उस गेट से ओवरहेड लाइन टच होने के कारण करंट प्रवाहित होने लगा है। नीचे के हिस्से में जलभराव रहता है, इसलिए वहां पानी में करंट आने की भी संभावना बनी रहती है। जबकि रेलवे क्रासिंग वाले रोड पर अंडरपास बनाए जाने के कारण दलदल बन चुका है।


रुका हुआ है काम


अंडरपास के लिए रेलवे की टीम पिछले दिनों लेवलिंग का काम कर रही थी लेकिन बारिश के बाद मिट्टी बहने के कारण दलदल के हालात बने हैं और काम भी फिलहाल रोका जा चुका है। हालात ये हैं कि कोई वाहन भी उस रोड से नहीं गुजर सकता, नतीजतन शवों को ले जाने के लिए लोग करंट वाले गेट पर वाहन छोड़ते हैं और वहां से जलभराव से बचते हुए छोटे रास्ते के जरिए उस को लादकर तकरीबन 50 मीटर तक लादकर ले जाते हैं और लादकर वापस ला रहे हैं।