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राजनीति के शालीन चेहरे पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी सपा में शामिल धर्मेंद्र यादव रहे मौजूद


यूपी। लखनऊ स्थित सपा कार्यालय अखिलेश यादव की मौजूदगी में बदायूं लोकसभा सीट से वे पांच बार सांसद रहे, जिसमें से चार बार सपा से और एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व वे सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुये थे। चुनाव में हार के बाद वे एक बार फिर से सपा में लौटे है इस मौके पर बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव रहे मौजूद।


इलाहाबाद के मूल रहने वाले सलीम शेरवानी का बदायूं से नाता वर्ष 1984 में जुड़ा। वह यहां से पहली बार बतौर कांग्रेस प्रत्याशी बदायूं आये और वर्ष 1984 में यहां की जनता ने उन्हें देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचा दिया। इसके बाद वह 1989 का चुनाव एटा से लड़े और हार गये। उस चुनाव में बदायूं से जनता दल प्रत्याशी शरद यादव सांसद बने।


1991 में सलीम शेरवानी फिर बदायूं लौटे और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर भाजपा प्रत्याशी स्वामी चिन्मयानंद से पराजित हुये। मुस्लिम मतों में पैठ के कारण इन चुनावों में हार के बावजूद सलीम शेरवानी अच्छी तादाद में वोट हासिल करने में कामयाब रहे थे।


वर्ष 1996 के चुनाव में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुये और यहां से लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1998, 1999 व 2004 के चुनाव में भी सपा प्रत्याशी के रूप में अपनी जीत दर्ज कराते रहे। उन्होंने 8 वीं, 11 वीं, 12 वीं, 13 वीं और 14 वीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बदायूं निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।


सपा से लगातार चार बार जीत हासिल करने के बाद 2009 के चुनाव में जब सपा ने बदायूं से धर्मेद्र यादव को लड़ाने का फैसला किया तो सलीम शेरवानी ने घर वापसी करते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर पराजित हुये। वे करीब दो लाख वोट हासिल करने में कामयाब रहे।


शेरवानी के साथ नहीं गये आबिद


माना जा रहा था कि वर्ष 2019 में सपा छोडकर सलीम शेरवानी के साथ कांग्रेस में शामिल हुये पूर्व मंत्री आबिद रजा भी सपा में शामिल होंगे। उन्होंने फिलहाल अपने आप को दूर रखा। कहा जा रहा है कि वे आजम खां की जेल से बाहर आने के बाद ही कोई फैसला लेंगे। आबिद के इस फैलसे ये यह संदेश गया कि अच्छे वक्त में साथ रहने के बाद राजनीतिक के बुरे वक्त में भी साथ नहीं छोड़न चाहिये। लोगों आबिद के फैसले का स्वागत किया।


दो बार केंद्रीय मंत्री रहे


सलीम शेरवानी को पांच बार लोकसभा पहुंचने का मौका बदायूं से ही मिला। इसमें दो बार केंद्र में मंत्री भी बनाये गए। इसके बाद एक बार फिर सपा में शामिल हुये और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में चले गये थे। अब एक बार फिर से सलीम शेरवानी ने सपा में वापसी की है।


उद्योगपति घराने से हैं शेरवानी


शेरवानी इलाहाबाद के बड़े उद्योगपति परिवार से हैं। वह नेओली शुगर फैक्ट्री के मालिक और कृषि इंटर कॉलेज के अध्यक्ष रहे हैं। शेरवानी परिवार का इंदिरा गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध था। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद, राजीव गांधी ने जोर देकर कहा और बदायूं की राजनीति में कदम रखा।


कब-कब किस पार्टी से सांसद रहे शेरवानी


पूर्व सांसद बदायूं से पांच बार सांसद रहे हैं। वह सबसे पहले वर्ष 1984 में बदायूं से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में आ गये और सपा के टिकट पर सबसे पहले वर्ष 1996 में बदायूं से सांसद बने और फिर वर्ष 1998, वर्ष 1999 तथा वर्ष 2004 में भी सपा से सांसद बने हैं। वह कांग्रेस में चले गये, फिर लोकसभा चुनाव वर्ष 2019 के पहले सपा में आ गये थे। चूंकि वर्ष 2019 के चुनाव को लेकर कांग्रेस में चले गये।

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