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  • Mohd Zubair Qadri

एक मुहर्रम उल-हराम इस्लामिक कैलेंडर के नए साल की शुरुआत और इमाम ए आली मकाम


खबर देश। इस्‍लाम धर्म के नए साल की शुरुआत मोहर्रम महीने से होती है, यानी कि मुहर्रम का महीना इस्‍लामी साल का पहला महीना होता है, इसे हिजरी भी कहा जाता है। हिजरी सन की शुरुआत इसी महीने से होती है, यही नहीं मुहर्रम इस्लाम के चार पवित्र महीनों में से एक है।


इस बार मुहर्रम का महीना अंग्रेजी की तारीख रविवार 31 जुलाई 2022 1444 हिजरी का नया इस्लामी साल शुरू हो रहा है जो कि 9 अगस्त को यौमे आशूरे का दिन होगा मुहर्रम की 10 तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में लोग कुरान ख्वानी व फातिहा ख्वानी और रोज़ा रखकर मनाते हैं।


पहला मुहर्रम उल-हराम यौमे शहादत हज़रत सैयदना अमीरुल मोमिनीन उमर फारूक ए आजम रज़ि अल्लाह ताला अन्हु की याद भी मनाते है।


पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती इमाम ए आली मकाम हजरत इमाम हुसैन इस्लाम और सच्चाई के लिए शहीद हुए थे। कर्बला की जंग हज़रत इमाम हुसैन और बादशाह यज़ीद की सेना के बीच हुई थी.

मोहर्रम में मुसलमान हज़रत इमाम हुसैन की इसी शहादत को याद करते हैं.

हज़रत इमाम हुसैन का मक़बरा इराक़ के शहर कर्बला में उसी जगह है जहां ये जंग हुई थी. ये जगह इराक़ की राजधानी बग़दाद से क़रीब 120 किलोमीटर दूर है और बेहद सम्मानित स्थान है. मोहर्रम महीने का दसवाँ दिन सबसे ख़ास माना जाता है. मुहर्रम के महीने में दसवें दिन ही इस्‍लाम की रक्षा के लिए हज़रत इमाम हुसैन ने अपने प्राणों का त्‍याग दिया था. इसे आशूरा भी कहा जाता है.

  • इस दिन हजरत मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ कबूल हुई थी जिनके ऐहतराम में नबी ने आशुरा का रोज़ा रखा था।

  • यौम ए आशुरा को आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कबूल हुई थी।

  • 10 मुहर्रम का ही वो दिन था जिस दिन नबी सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरां की छोटी पर नुबुवत का ऐलान किया था।

  • इसी दिन इब्राहिम अलैहिस्सलाम आतिश ए नमरुद से बाहर निकले थे।

  • आशुरा के ही दिन हमारे नबी के नवासे और शेरे खुदा के बेटे इमाम हुसैन ने इस्लाम के खातिर शहादत पाई थी।

  • 10 मुहर्रम के ही दिन कयामत आएगी।

इस दिन रोज़ा रखने से ढेरों सवाब हासिल होगा।

10 मुहर्रम के दिन रोज़ा रखने से ढेरों सवाब हासिल होता है, क्योंकि रमजान उल मुबारक के रोजे के बाद सबसे ज्यादा फजीलत वाले रोजे 10 मोहर्रम के ही हैं.

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