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हाईकोर्ट के फैसले पर पंचायत चुनाव को आरक्षण में आंकड़ा बदलने से गांव-गांव नेताजी परेशान


यूपी बदायूं। हाईकोर्ट के फैसला के बाद पंचायत चुनाव को आरक्षण में आंकड़ा बदलने से गांव-गांव के तमाम नेताजी परेशान हो उठे हैं। गांव में नेतागीरी बचाने तथा खर्च किये गये धन को बचाने के लिये अब वह ऊंचे-नीचे पद को भूल गये हैं। जिस पद के लिये आरक्षण आ रहा है, उसके लिये चुनाव लड़ने को तैयार हैं।


त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधानी चुनाव से लेकर बीडीसी और जिंप सदस्य पद के चुनाव पर आरक्षण के आंकड़े बदल गये हैं। आरक्षण में किसी के गांव में प्रधानी का आरक्षण जातीय आंकड़े से बाहर हो गया है तो किसी का बीडीसी से। कोई जिला पंचायत सदस्य पद के लिये आरक्षण ने खेल बिगाड़ दिया है तो वहीं का ब्लाक प्रमुखी का। दिन भर आरक्षण देखने के बाद गांव-गांव में देखने को मिल रहा ह।


जिसका जिला पंचायत सदस्य का आरक्षण बदल गया है तो वह प्रधानी का चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अगर प्रधानी का भी आरक्षण जातीय आंकड़े के फिट नहीं है तो वह बीडीसी लड़ने के तैयार हो गये हैं। इसी तरह से प्रधानी चुनाव लड़ने वाले बीडीसी लड़ रहे हैं। आरक्षण जहां ठीक बैठ रहा है वहीं चुनाव लड़ रहे हैं। गांव-गांव चर्चा है कि आरक्षण से पहले ही दावेदार अपना भरपूर रुपया खर्च कर चुके हैं। अब रुपया एवं नेतागीरी को बचाने के लिये कोई भी पद पर चुनाव लड़ने के लिये तैयार हैं।