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कांग्रेस की जिला पंचायत सदस्य का घर तोड़ने पहुंची प्रशासन टीम, दबाव की बात निराधार एसडीएम


यूपी बदायूं। कुंवरगांव। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को मतदान होना है। इससे पहले सदस्यों को किसी भी तरह से अपने पाले में लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पुलिस-प्रशासन की टीम मंगलवार देर शाम जिला पंचायत के वार्ड नंबर छह से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने वाली पड़ौलिया निवासी ईश्वरवती का घर तोड़ने पहुंच गई। इस दौरान मौके पर काफी भीड़ जुट गई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह भी पहुंच गए। तकरार के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम बुधवार तक का वक्त देकर वापस चली गई।


पंचायत चुनाव में पड़ौलिया निवासी अनुसूचित जाति के राजू सदस्य पद के दावेदार थे। नामांकन से पहले उनकी मौत हो गई तो पत्नी ईश्वरवती ने बतौर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी नामांकन कराया और भारी अंतर से चुनाव जीत गईं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होना है। दोनों ही दलों के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। ऐसे में सदस्यों को किसी भी हथकंडे से अपने साथ लाने की कोशिशें हो रही हैं। मंगलवार को एसडीएम सदर लालबहादुर, तहसीलदार सदर, सीओ सिटी चंद्रपाल सिंह भारी पुलिस बल के साथ ईश्वरवती के गांव पड़ौलिया पहुंच गए। गांव की बीच आबादी में बने ईश्वरवती के घर के निर्माण को ग्राम पंचायत की भूमि पर होने की बात कहते हुए इसे ढहाने की तैयारी करने लगे। उस समय ईश्वरवती घर पर नहीं थीं।


परिवार के लोगों ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह को सूचना दी तो वह पड़ौलिया पहुंच गए। अधिकारियों से अवैध निर्माण गिराने से पहले नोटिस दिए जाने के बावत पूछा तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। मौके पर देर रात तक गहमागहमी रही। ईश्वरवती के एक रिश्तेदार का मोबाइल भी पुलिस अधिकारी छीन ले गए। दबाव में आने के बाद ईश्वरवती को बुधवार सुबह तक घर खाली करने का अल्टीमेटम देकर पुलिस प्रशासन की टीम यहां से चली गई। जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ इस कार्रवाई के बाद सत्ता पक्ष पर आरोप लग रहे हैं। जिले की राजनीति भी गरमाने लगी है।


किसी का घर तुड़वाने की संस्कृति भाजपा की नहीं है। हम रुपये देकर नहीं मन जीतकर वोट ले रहे हैं। हमारे पास पर्याप्त सदस्य हैं। भले ही वह निर्दलीय चुनाव जीते हों। भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर वह हमारे साथ हैं तो हमें ऐसे ओछे हथकंडे अपनाने की जरूरत नहीं है। पड़ौलिया में जो हुआ है, उसकी जानकारी मुझे नहीं है।


अशोक भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष

प्रशासन की टीम जब किसी सरकारी संपत्ति पर कब्जे के मामले में कार्रवाई को जाती है तो नियमानुसार पुलिस को साथ लिया जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा। पुलिस अपनी ओर से तोड़फोड़ जैसी कोई गतिविधि नहीं करती है। शासकीय टीम को मौके पर सुरक्षा उपलब्ध कराना पुलिस की जिम्मेदारी है।


प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी

ईश्वरवती का पति राजू करीब दस साल पहले इस गांव का प्रधान था। तब उसने पंचायत घर की जगह घेरकर मकान बना लिया जिसे परिवार फिलहाल पशुशाला के रूप में प्रयोग करता है। इस बारे में प्रशासन को कहीं से जानकारी मिली तो जांच में आरोप सही पाया गया। इसी आधार पर इनके परिवार को चेतावनी दी गई है कि अपना सामान इस घर से निकाल लें। प्रशासन अवैध रूप से बनाए निर्माण को गिराकर सरकारी जगह खाली कराएगा। इसके पीछे कोई राजनैतिक दबाव की बात निराधार है।


लाल बहादुर, एसडीएम सदर

दोपहर में आए थे गुंडे, 40 लाख रुपये का दिया ऑफर

कुंवरगांव। जिला पंचायत सदस्य ईश्वरवती रिश्तेदारी में गई हुई हैं। पुलिस-प्रशासन की टीम जब पड़ौलिया पहुंची तो ईश्वरवती के घर पर बेटी गीतांजलि, पुत्रवधु नीरज पत्नी ब्रजेश, रीनू पत्नी सुरजीत और सबसे छोटा बेटा अजय थे। ननद भगवान देवी भी घर आई हुई हैं। गीतांजलि और भगवानदेवी का कहना है कि दोपहर के वक्त उनके घर पर दो लोग आए थे। पुलिस भी उनके साथ थी। इन लोगों ने ईश्वरवती के बारे में पूछा जब हम लोगों ने जानकारी न होने की बात कही तो 40 लाख रुपये देने का लालच दिया। यह भी कहा कि अगर ईश्वरवती का पता बता दें तो जो चाहो वह मिल जाएगा लेकिन उन लोगों ने पता नहीं बताया। शाम को पुलिस-प्रशासन की टीम उनका घर ढहाने पहुंच गई।


पुलिस पर मोबाइल छीनने का जड़ा आरोप

कुंवरगांव। जिला पंचायत सदस्य ईश्वरवती के जेठ ओमकार सिंह से भी पुलिस-प्रशासन ने ईश्वरवती के बारे में पूछताछ की। जब उन्होंने नहीं बताया तो एक इंस्पेक्टर ने उनका मोबाइल छीन लिया। मोबाइल वापस मांगने पर कह दिया कि मोबाइल कल मिलेगा। अगर बुधवार सुबह तक घर खाली नहीं किया तो उनकी खुद की जिम्मेदारी होगी। घर ढहा दिया जाएगा।


राजनैतिक दबाव में काम कर रही है पुलिस : कांग्रेस जिलाध्यक्ष

बदायूं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह का कहना है कि पुलिस पूरी तरह से राजनैतिक दबाव में काम कर रही है। अगर कोई अवैध निर्माण ढहाया जाना है तो उससे पहले नोटिस दिया जाना था, लेकिन ईश्वरवती के मामले में ऐसा नहीं किया गया। पार्टी विशेष के पक्ष में ईश्वरवती जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपना वोट दें इसके लिए राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई की जा रही है। इस बारे में कांग्रेस पार्टी हाईकमान को जानकारी दी जा रही है।


बेटे को कार में डालकर ले जाने की कोशिश

कुंवरगांव। ईश्वरवती का घर बीच गांव में है। आसपास भी घर बने हैं। परिवारवालों का कहना है कि करीब 15 साल पहले यह निर्माण कराया था। दोपहर को जब दो लोग ईश्वरवती के बारे में जानकारी लेने पहुंचे तो उनको कुछ पता नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने ईश्वरवती के पुत्र ब्रजकिशोर को गाड़ी में डालकर ले जाने की कोशिश की। गांव में विरोध होने पर वह ब्रजकिशोर को छोड़कर चले गए। शाम को ही परिवार ने पशुशाला का सामान यहां से निकालकर अपने मूल घर में ले जाना शुरू कर दिया।