• Nationbuzz News Editor

बदायूं में गरीबों को लूट रहे प्राइवेट अस्पताल, सिटी मजिस्ट्रेट के छापे में खुली पोल


यूपी। बदायूं जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या कुछ और, जो शहर के अंदर मानकों को बिना पूरा किए दर्जनों नर्सिंग होम चल रहे हैं पैसों के खातिर सिर्फ गरीबों लूट रहे है प्राइवेट अस्पताल। इसका खुलासा सिटी मजिस्ट्रेट के द्वारा लगातार छापा मारने के बाद हो रहा है। बीएमएस और बीयूएमएस डॉक्टरों व स्टाफ से डिलीवरी कराई जा रही हैं और ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। इसकी हकीकत सिटी मजिस्ट्रेट सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम को हाथ लग चुकी है। वहीं प्रशासन का छापामारी अभियान जारी है और छापामारी के बाद बिना डॉक्टर के मरीज मिलने पर नोटिस जारी किया है। सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार, जिला पंजीकरण सेल एवं प्रभारी झोलाछाप अभियान व एसीएमओ डॉ. केके जौहरी, लिपिक सुरेश चंद्र ने छापमारी की।


सबसे पहले शहर के मोहल्ला नई सराय स्थिति डॉ. ओमवती के अस्पताल पहुंचे। अस्पताल तो खुला था लेकिन कोई मरीज नहीं था साथ ही मौके पर संचालक डॉ. ओमवती भी नहीं मिली हैं। इसकी वजह से टीम वापस चली आई और एसीएमओ से नोटिस देने को कहा है। इसके बाद दातागंज रेलवे क्रासिंग जनसेवा अस्पताल पहुंचे। यहां बताया कि अस्पताल बंद हो चुका है, यहां भी बीएमएस डॉक्टर तैनात मिले हैं। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन सेवानिवृत्त मंडी सचिव के नाम था। सिटी मजिस्ट्रेट ने पूरी तरह से बंद करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सूचना मिली की मीरा सराय रोड़ पर संचालित रहनुमा कॉसमोसअस्पताल पर बिना डॉक्टरों के सीजर ऑपरेशन होने वाला है। इस सूचना पर छापा मारा तो प्रसूता डिलीवरी के लिए मिली तो हैं, लेकिन उस समय तक डिलीवरी व ऑपरेशन नहीं हुआ था। छापा मारने के दौरान कोई स्त्रीरोग विशेषज्ञ नहीं मिला है, बीएमएस और बीयूएमएस डॉक्टर उपचार करते मिले हैं। दातागंज से आई प्रसूता को सिटी मजिस्ट्रेट ने एंबुलेंस बुलाकर जिला महिला अस्पताल भेजा। इसके बाद नोटिस दिया है, बिना डॉक्टर के अस्पताल चलाने पर कार्रवाई को निर्देश दिए हैं।ऑनकाल के नाम पर डॉक्टरसिटी मजिस्ट्रेट की टीम ने अब तक निरीक्षण किया, उन अस्पतालों में या तो बीएमएस, बीयूएमएस डॉक्टर मिले हैं। अधिकांश डॉक्टर मौके पर नहीं थे, वहीं जहां सर्जन की बारी आती है तो ऑनकाल की बात आ जाती है। मगर जिला पंजीकरण अधिकारी ने साफ कर दिया है ऑनकाल डॉक्टर दूसरे जिलों के नहीं मान्य हैं, स्थानीय जिले का होना चाहिए।कार्रवाई के डर से बनाया अस्पताल बंद का लेटरजिला प्रशासन का अस्पतालों के खिलाफ छापामारी अभियान चल रहा है। छापामारी अभियान को लेकर प्राइवेट अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। कुछ अस्पतालों ने तो बचने के लिए नया खेल शुरू कर दिया है कि लेटर लिखकर रख लिया है कि अस्पताल बंद कर दिया है। जनसेवा अस्पताल पर देखने को मिला है। जहां एक दिसंबर को अस्पताल बंद कर दिया है और अस्पताल खुला था। हालांकि मरीज कोई नहीं था। मगर स्वास्थ्य विभाग को बंद की जानकारी नहीं थी।अस्पताल पर कुछ और रजिस्ट्रेशन में कुछ और नामस्वास्थ्य विभाग के रजिस्ट्रेशन रजिस्टर में कॉसमोस अस्पताल 38 नंबर पर है और विभाग द्वारा जारी की गई सूची में 37 नंबर पर कर दिया। इतना ही नहीं अस्पताल पर बोर्ड रहनुमा कॉसमोस अस्पताल लिखा है और रजिस्ट्रेशन केवल कॉसमोस के नाम से किया गया है।


निरीक्षण के दौरान एक अस्पताल में मरीज व संचालक कोई नहीं मिला है। नोटिस दिया जाएगा और फिर निरीक्षण करेंगे। जनसेवा अस्पताल संचालक ने बताया बंद कर दिया है। रहनुमा अस्पताल में डिलीवरी को प्रसूता भर्ती थी उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती करा दी है। बिना एमबीबीएस डॉक्टर के महिला की डिलीवरी कराई जा रही हैं, सभी को नोटिस दिया है।अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट

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