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प्राइवेट अस्पताल फुल, लैबों पर वसूली का खेल जारी जांच के दोगुने दाम कर दिये गए


यूपी बदायूं। डेंगू फैल चुका है और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थायें दम तोड़ चुकी हैं। जिसकी वजह से बीमार भी सरकारी अस्पतालों से दूरियां बनाने लगे हैं। उन्हें पता है जब यहां इलाज ही नहीं मिलेगा तो समय क्यों जाया किया जाये। जिसके चलते पीड़ित तीमारदारों के साथ प्राइवेट व झोलाछापों के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। प्राइवेड अस्पताल तो फुल हो गये हैं लेकिन फिर भी लोग उपचार के लिये लाइन लगाये हैं। ऐसे में अस्पतालों की ही नहीं मेडिकल स्टोर और लैब संचालकों की चांदी कट रही है।


जिले में डेंगू के मरीज सरकारी अस्पताल से कम प्राइवेट अस्पताल व पैथलॉजी लैब से डेंगू की पुष्टी की जा रही है। मगर कहां का मरीज डेंगू ग्रस्त हैं और कहां भर्ती कब से है इसकी जानकारी प्राइवेट अस्पताल संचालक स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं। इसलिये अधिकारियों को पता नहीं चल रहा है कि डेंगू के मरीज निकल रहे हैं या नहीं निकल रहे हैं।


शहर के सभी अस्पताल डेंगू के मरीजों से हाउसफुल हैं। यहां मरीजों को भर्ती करने के लिये जगह नहीं मिल रहे हैं। वहीं पैथोलॉजी लैब पर जांच कराने की लाइन लगी हैं, लैब संचालकों ने भी समय को देखते हुये जांच के दोगुने दाम कर दिये हैं। मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड की जांच के पहले जब 200 से 300 रुपये जाते थे अब वहीं लैबों ने 400 से 600 कर दिये हैं।


क्षमता से ज्यादा मरीज, तोड़ रहे दम


शहर में तमाम अस्पताल चल रहे हैं। इन्होंने जब पंजीकरण कराया तभी व्यवस्थाओं को खींचतान कर कराये हैं इसके बाद ऊपर से अब मरीजों की लाइन लगी है इसलिये कमाई के लालच में क्षमता से ज्यादा मरीज कर रखे हैं। अस्पतालों के रजिस्ट्रेट दस बैड के हैं वर्तमान में 20 से 30 मरीज भर्ती हैं। ऐसे में कई अस्पतालों में मरीजों को ऑक्सीजन सहित पूरे संसाधन नहीं मिल रहे हैं जिससे दम तोड़ते जा रहे हैं।


घरों में अवैध रूप से चल रहीं लैब


शहर से देहात तक पैथलॉजी लैब का मकड़जाल फैला हुआ है। पैथलॉजी लैब शहर से देहात तक दर्जनों चल रही हैं लेकिन विभाग को चूना लगाया जा चुका है। बिना किसी पंजीकरण और टीम के अवैध तरीके से लैब चल रही हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग की नींद अभी भी नहीं टूटी हैं स्वास्थ्य विभाग अवैध लैब पर कार्रवई नहीं की जा रही है। जबकि लैब से रिपोर्ट भी ठीक नहीं आ रही है।