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राष्ट्रीय लोक दल अपनी पार्टी की छवि को धूमिल करने में लगी, दागियों पर जता रही भरोसा


यूपी। विधान सभा चुनाव आते ही वक़्त की नज़ाकत को और हालत को देखते हुए पार्टीया एक एक से दमदार नेताओ पर दाओ लगाने को तैयार हैं और करें बात समाजवादी पार्टी की तो अखिलेश यादव अपनी पार्टी को दिन पे दिन मज़बूत कर रहे हैं और समाजवादी कुनबे को और मज़बूत कर रहे हैं वही उनके सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक दल अपनी पार्टी की छवि को धूमिल करने में लगी हुई हैं जैसा की बीते दिन अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की राज्यकारिणी में प्रदेश अध्यक्ष उस आदमी को बनाया जिसने बसपा सरकार में ज़मीन कब्ज़ाने, मारपीट करने, कब्रिस्तानो पर कब्ज़ा करने, लोगो को धमकाने और यहाँ तक की यवती भगाने के इलज़ाम में मुक़दमा धारा संख्या 366 में मुक़दमा भी दर्ज हैं. जयंत चौधरी जैसे बड़े लीडर ने दाओ भी उस बन्दे पर खेला जो खुद 3 बार विधानसभा के चुनाव में 1 बार कुल 1000 से 1500 वोट पर सिमट कर रह गया सूत्रों के हवाले से ख़बर ये भी थी भारतीय जनता पार्टी के कंडीडेट से पैसे लेकर समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट नईमुल हसन को हराने के लिए गौहर इक़बाल ने चुनाव लड़ा पर क़ामयाब ना हो सके. जबकी लोकदल के पुराने और मज़बूत लीडर्स को नज़रअंदाज़ करके लोकदल गौहर इक़बाल में ऐसा क्या तलाश कर बैठी की उन्हें इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी से नवाज़ा जिसका उन्हें इसका खामियाज़ा अपने पूरे मण्डल में भी उठाना पढ़ सकता हैं।


इसपर लोगो की राय को माने तो आर एल डी पार्टी के पास राजनीती में एक से एक धुरंधर, कद्दावर लीडर्स की फौज हैं ऐसे समय में लगड़े घोड़े पर दाओ लगाना किसी को समझ नहीं आ रहा हैं. आगे देखना होगा पार्टी जिस ज़ोर शोर से अपना निशाना 2022 बनाई हुई हैं क्या उसे पाने में इन भू -माफिया, गैर समाजी लोगो के साथ 2022 के लिए तैयार हो पायेगी या नहीं यह तो वक्त बताएगा।