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फोटो एवं प्रदर्शनी/सम्मान समारोह, जनपद के श्रेष्ठ विद्यालय को मिला सम्मान


बदायूं। उत्तर प्रदेश शासन में नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग के राज्यमंत्री महेश चन्द्र गुप्ता, बदायूँ सांसद संघमित्रा मौर्य, जिलाधिकारी कुमार प्रशान्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी एवं भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक भारतीय ने कायाकल्प के अन्तर्गत परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में 14 पैरामीटर पूर्ण वाले जनपद के समस्त विकास खण्डों में श्रेष्ठ विद्यालयों की फोटो एवं प्रदर्शनी/सम्मान समारोह का फीता काटकर उद्घाटन किया एवं श्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, ग्राम प्रधान एवं ग्राम सचिव को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।


शुक्रवार को कलेक्ट्रेट हाॅल में कायाकल्प योजना के अन्तर्गत श्रेष्ठ विद्यालयों की फोटो एवं प्रदर्शनी/सम्मान समारोह आयोजित किया गया। 14 पैरामीटर्स के संतृप्त हुए सबसे बेहतर विद्यालयों में मूल्यांकन के अंकों के आधार पर सामान अंक प्राप्त होने पर प्राथमिक विद्यालय आमगांव एवं कम्पोजिट हर्रायपुर बिसौली को प्रथम-प्रथम, प्राथमिक विद्यालय सालारपुर अन्तर्गत गुरुपुरी प्राथमिक विद्यालय द्वितीय तथा कम्पोजिट ईश्वरी ममता म्याऊं को तृतीय स्थान मिला है। इन सभी विद्यालय के प्रधानाचार्य ग्राम प्रधानों एवं ग्राम सचिवों को प्रतीक चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कमेटी बनाकर शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक एवं बालिका शौचालय एवं मुत्रालय में जल नल आपूर्ति व टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टी हैण्ड वाॅशिंग यूनिट, रसोई घर, कक्षाओं के फर्श का टाइलीकरण, श्यामपट, विद्यालय की समुचित रंगाई-पुताई, दिव्यांग सुलभ रैम्प व रेलिंग, कक्षाओं में संयुक्त वायरिंग एवं विद्युत उपकरण एवं विद्यालय का विद्युत संयोजन आदि व्यवस्थाओं को परखकर प्रत्येक ब्लाॅक के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सबसे बेहतर विद्यालयों को सम्मानित किया गया।


राज्य मंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को देखकर लगता है प्राईवेट स्कूलों से भी ज्यादा सुन्दर हैं। पहले और अब के विद्यालयों में बहुत बड़ा अन्तर देखने को मिलता है। पहले जब बच्चा स्कूल में घुसता तो देखता था कि प्लास्टर और फर्श टूटा हुआ है और उसके कपड़े भी ऐसे ही हैं, लेकिन जब वह पड़ोस के प्राईवेट विद्यालय में जाता था तो उसके मन में स्वंय को लेकर हीन भावना आती थी। लेकिन आज जब वह सरकारी विद्यालय में जाता है तो देखता है कि कितना सुन्दर विद्यालय है, रंग-बिरंगी पुताई की गई है, टाइल्स चमचमा रही हैं और उसके डेªस भी प्राईवेट स्कूलों की तरह ही सुन्दर है। इसे देखकर बच्चे का चेहरा खुशी से गुलाबी हो जाता है। इसके पीछे विद्यालय के परिश्रमी अध्यापकों का बहुत बड़ा योगदान हैं, जिन्होंने मेहनत करके सरकारी विद्यालयों को प्राईवेट स्कूलों से बेहतर बनाया है। आज देश में हर तरफ अच्छा हो रहा है, हर देश भारत की ओर देख रहा है और सम्पूर्ण विश्व में भारत का डंका बज रहा है।


सांसद बदायूँ ने अध्यापक, प्रधान एवं सचिवों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय को सुन्दर बनाना किसी मंदिर से कम नहीं है, विद्यालय स्वयं में विद्या का मंदिर होता है। जिस प्रकार एक कुम्हार घड़े को बनाता है, ठीक वैसे ही अध्यापक बच्चों का भविष्य बनाते हैं। जीवन को देने वाले माता-पिता के बाद जीवन सुधारने वाले अध्यापक का नाम ही आता है। जिस प्रकार अध्यापकों ने विद्यालयों को इतना अच्छा बनाया है, इन विद्यालयों के साथ-साथ इनमें पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य कई गुना सुन्दर बनाने में मेहनत करें, ताकि आने वाले समय में बच्चे पढ़कर आगे बढ़े और जनपद का नाम रोशन करें, बच्चों को अच्छी शिक्षा दंे।

जिलाधिकारी कुमार प्रशान्त ने कहा कि प्रशासन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो एजूकेशन सिस्टम बड़ा महत्वपूर्ण स्थान रखता हैै। यह ऐसा स्थान होता है, जहां जाकर अपना और देश का भविष्य सुधारा जा सकता है। नवनिहाल बच्चों को अच्छी दिशा देने में प्रयास किया जाता है। शिक्षक का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण होता हैै। शिक्षकों ने कड़ी मेहनत करके विद्यालयों को सजाया-संवारा है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास था कि कैसे सभी विद्यालयों को बाउंड्री वाॅल बनाकर, टाइल्स व पानी आदि व्यवस्थाओं से संतृप्त किया जाए। इसमें अध्यापक, प्रधान और सचिव ने बहुत सहयोग किया है। ग्राम निधि की राशि का सही प्रयोग किया गया। इसलिए वह प्रशंसा के पात्र है। प्रधान ऐसा अच्छा कार्य करें, जो आने वाले समय में नज़ीर बने।


लोग अच्छे कार्याें को सब याद करते हैं। शिक्षक दी गई सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाएं। सरकारी शिक्षकों को अच्छा वेतन मिलता है, इतने सुन्दर सरकारी विद्यालय बन जाने पर अक्सर देखा जाता है कि बच्चों की उपस्थिति कम रहती है। जबकि प्राईवट विद्यालयों में इतने कम वेतन में शिक्षक पूर्ण मेहनत करके बच्चों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान देते हैं। शिक्षक ग्रामीणों का जागरुक कर बच्चों की उपस्थिति बढ़ाएं। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 नरेन्द्र बहादुर सिंह, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट महीपाल सिंह, डीआरओ किशोर गुप्त, बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपाल सिंह राजपूत, अजय कुमार, सरवर अली, आदि उपस्थित रहे।

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