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इंसानियत के हामी हर किसी के सुख दुख वाटने वाले का यूं चला जाना एक अपूरणीय क्षति है


यूपी बदायूं। काजी-ए-जिला शेख अब्दुल हमीद मोहम्मद सालिमुल कादरी का जाना देश और समाज की ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी रिक्तता का अहसास हम लंबे समय तक करते रहेंगे।

औलियाओं की रियासत रहने वाली बदायूं की सरजमीन का रूहानी विषय भी बहुत बड़ा है। हजरत मीराजी, बड़े-छोटे सरकार, हजरत निजामुद्दीन और अमीर खुसरो से यह दौर। कुछ तो खास रहा होगा, जो इस सरजमी ने सूफी, संतों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। रूहानी खिदमत करने वाले उसमानिया घराने के हजरत अब्दुल हमीद सालिमुल कादरी का चला जाना उनके चाहने वालों को झकझोर गया।


हजरत मोहम्मद साहब के दामाद हजरत उसमान गनी के घराने से तअल्लुक रखने वाले हजरत दानियाल क़ादरी से इनका सिलसिला मिलता है। यह परिवार 800 साल पहले पहले कतर से हिन्दुस्तान आया था। अपने अखलाक से हिन्दुस्तानियों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। पीर सालिम की पैदाइश 1939 को मौलवी अब्दुल कदीर साहब के यहां हुयी। घर में दीनी माहौल था, इसलिए रूहानियत उनकी सांसों में बसती थी। सन् 1960 में खानकाह आलिया कादरिया के सज्जादा बनने के साल भर बाद निकाह हुआ।


बतौर पीर वह अखलाक के दम पर अलग पहचान रखते थे। यही वजह है कि देश में ही नहीं विदेशों में भी उनके मुरीद हैं। खास बात यह थी कि हर मजहब के लोग उन्हें मानते थे।


इराक हमले में बगदाद में गई थी एक पुत्र शेख साहब की जान

काजी-ए-जिला शेख अब्दुल हमीद मोहम्मद सालिमुल कादरी के तीन बेटा उसैदुल हक़ मोहम्मद आसिमुल कादरी, अतीफ मियां कादरी और अज्जाम मियां कादरी हैं। उसैदुल हक़ मोहम्मद आसिमुल कादरी बेहद काबिल शख्सियत के मालिक थे। वह मिस्र के इजिप्ट स्थित जमीअतुल अजहर संस्थान से उच्च शिक्षित थे। वर्ष 2015 में इराक हमले में बगदाद में हुए एक आत्मघाती हमले में उनकी मौत हो गई थी। उनको बगदाद में ही सुर्पुद-ए-खाक किया गया था। उनकी काबिलियत के लोग आज भी मुरीद हैं।

Editor in chief of Nationbuzz News, Mohammad Zubair Qadri