• nationbuzz3

औचक निरीक्षण, डीएम ने निर्देश दिए बच्चों को उपलब्ध कराई जाए बेहतर सुविधाएं


यूपी बदायूं। जिलाधिकारी दीपा रंजन ने प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी संतोष कुमार के साथ नेकपुर स्थित विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण तथा कृष्णापुरी स्थित बाल गृह शिशु का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाल गृह शिशु के अधीक्षक अतुल कुमार से बच्चों के पालनपोषण के बारे में पूछताछ की। रसोई घर में जाकर रसोइया से रसोई की व्यवस्था के बारे में भी जाना। मैन्यु के अनुसार रसोई में बरी आलू तथा बंद गोभी की सब्जी, चाबल व रोटी बनाई गई थी, जिसकी गुणवत्ता का भी उन्होंने निरीक्षण किया। भोजन की गुणवत्ता बेहतर पाई गई। बच्चों से भी उन्होंने भोजन एवं मनोरंजन सहित अन्य सुविधाओं के बारे में भी बात की। बच्चों ने भोजन सहित अन्य सुविधाओं की आपूर्ति के बारे में जानकारी दी कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिलाधिकारी ने बाल गृह शिशु के संचालक अनूप कुमार सक्सेना को निर्देश दिए कि वह बच्चों को बेहतर सुविधाएं व गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराएं।


डीएम ने विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण में ग्रह की प्रबंधिका प्रियंका जौहरी से नवजात शिशुओं के पालन पोषण एवं टीकाकरण के सम्बंध में जानकारी प्राप्त की। प्रबंधिका ने अवगत कराया कि बच्चों का समय से टीकाकरण कराया जाता है। बालरोग विशेषज्ञ द्वारा मासिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। ग्रह के संचालक ने अवगत कराया कि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के बारे में केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) द्वारा निर्देशित गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाता है। अब तक संस्थान तीन बच्चों को बैंगलौर, कोलकाता एवं गाजियाबाद की निःसंतान दम्पत्तियों गोद दिया जा चुका है। डीएम ने प्रबंधिका को निर्देश दिए कि वह बच्चों के अच्छे पोषण के लिए डायट प्लान तैयार करें।


डीएम ने निर्देश दिए कि नोवेल कोरोना वायरस के प्रति बच्चों को जागरुक किया जाता रहे तथा

सोशल का डिस्टेंस का पालन किया जाता रहे। सुरक्षा की दृष्टिगत से गार्ड की व्यवस्था रहे एवं सीसीटीवी कैमरे निरंतर चालू रहें। उन्होंने निर्देश दिए कि अग्निशमन विभाग फायर एक्सटिंगगशर सहित अन्य यंत्रों को आकर नियमित चेक करे कि यह ठीक है या नहीं। उन्होंने यहां रह रहे बच्चों से भोजन, नाश्ता व मनोरंजन के सम्बंध में भी पूछा। उन्होंने निर्देश दिए कि भोजन मैन्यु अनुसार ही दिया जाए, बीच बीच में बच्चों की समस्याओं को भी उनसे पूछते रहें। समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी होता रहे। पीने के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था रहे।