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किसान संगठनों का सद्भावना दिवस, दिनभर रखेंगे उपवास चप्पे चप्पे पर पुलिस की पैनी नज़र


खबर देश। नई दिल्ली: किसान संगठनों के नेताओं ने कहा है कि केंद्र के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सद्भावना दिवस मनाएंगे और दिन भर का उपवास रखेंगे. किसान नेताओं ने दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सुबह 9बजे से शाम 5 बजे तक उपवास रखा जाएगा. उन्होंने देश के लोगों से किसानों के साथ जुड़ने की अपील की. इस बीच, दिल्ली पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में अब तक 44 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें दिल्ली-हरियाणा सिंघू बॉर्डर पर झड़पों के दौरान शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी पर तलवार से हमला करने वाला व्यक्ति भी शामिल है. तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दो महीने से भी ज्यादा समय से किसान दिल्ली के अलग-अलग सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।


भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) के एक नेता ने कहा कि हरियाणा में कई खाप पंचायतों ने बैठकें कीं और किसान आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि कई गांवों ने प्रदर्शन में अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली भेजने का फैसला किया है. शिरोमणि अकाली दल ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं पर तीन प्रदर्शन स्थलों पर आंदोलन को मजबूती देने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचें.

कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे और राकेश टिकैत से मिलकर किसानों के प्रति एकजुटता व्यक्त की. नए कृषि कानूनों के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा कि वह शनिवार को गाजीपुर प्रदर्शन स्थल पर जाएंगे और टिकैत तथा किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करेंगे. वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि लालकिला परिसर की घटना के चलते किसानों के खिलाफ किया जा रहा दुष्प्रचार बंद किया जाना चाहिए. सिंह ने कहा, ‘‘जो हो रहा है और जो सिंघू बॉर्डर पर हुआ, पाकिस्तान वही चाहता है।

अन्य विरोध स्थलों में से एक, गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे हजारों प्रदर्शनकारियों को गाजियाबाद प्रशासन ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है बावजूद इसके हजारों किसान वहां फिर से इकट्ठे हो रहे हैं. इसे देखते हुए वहां भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के समर्थक शुक्रवार को दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर से एकत्र होने लगे और वहां किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है।


केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में से एक टीकरी बॉर्डर पर शुक्रवार को किसानों को वहां से हटाने की मांग को लेकर स्थानीय होने का दावा करने वाले लोगों के एक समूह ने प्रर्दशन किया जिससे वहां का माहौल कुछ समय के तनावपूर्ण हो गया. राष्ट्रीय झंडा लिए आसपास के इलाकों के करीब 30-40 लोगों ने 26 जनवरी को किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा तिरंगे का कथित रूप से ‘अपमान' करने के खिलाफ नारेबाजी की. मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने कुछ समय बाद समूह को वापस जाने के लिए राजी कर लिया।

किसान नेताओं ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि कृषि कानूनों के खिलाफ "शांतिपूर्ण" आंदोलन को "बर्बाद" करने का प्रयास किया जा रहा है. नेताओं ने कहा, ‘‘इस किसान आंदोलन को नष्ट करने की सत्ताधारी भाजपा की साजिश अब सामने आ गयी है.''किसान नेताओं ने यह भी दावा किया कि बृहस्पतिवार की रात गाजीपुर सीमा से किसान नेता राकेश टिकैत को हटाने की पुलिस की कथित कोशिश के बाद सभी प्रमुख प्रदर्शन स्थलों - गाजीपुर, सिंघू और टीकरी में आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ रही है।


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